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Friday, December 6, 2019

दुबले-पतले हैं तो हफ्ते भर में वजन बढ़ा बना देंगे ये घरेलू नुस्खे, ये है मोटा होने का रामबाण इलाज

December 06, 2019 0

कई लोग वजन घटाने के लिए जिम जाते हैं तो कई वजन बढ़ाने के लिए। ऐसा देखने में आता है कि जिम जाने पर वजन कम तो हो जाता है लेकिन सुडौल, मजबूत शरीर के साथ वजन बढ़ाने की चाहत में जिम जाना उतना कारगर नहीं सिद्ध हो पाता। कहा भी जाता है कि लोहा उठाने से व्यक्ति पहलवान नहीं बनता बल्कि अच्छा खाना खाने से बनता है। दरअसल, वजन बढ़ाने के लिए कई तरीके हैं लेकिन आइए आपको बताते हैं कुछ ऐसे घरेलू नुस्खे जिनसे ना केवल आपका वजन बढ़ेगा बल्कि शरीर मजबूत होकर सुडौल भी दिखने लगेगा। 


आलू में कार्बोहाड्रेट और स्टार्च होता है जो शरीर के लिए फायदेमंद है।आलू- यकीनन आप सोच रहे होंगे आलू किस तरह से आपका वजन बढ़ा सकता है। दरअसल, यदि आप आलू को अपनी डाइट में रोजाना के लिए शामिल करते हैं तो आपका वजन बढ़ना तय है। आलू में कार्बोहाइड्रेट्स और कॉम्प्लेक्स शुगर होता है। इसके नियमित सेवन से वजन शर्तिया बढ़ता है। कोशिश करें कि आप अलग-अलग तरीके से आलू खाएं ताकि स्वाद में अच्छा लगे और डेली इसका सेवन कर पाएं। ये कोशिश करें कि आलू का तलकर उपयोग ना करें। ये नुकसान पहुंचा सकता है। पेट और गैस संबंधी रोग तले हुए आलू से ज्यादा होते हैं।
केला अपने आप में संपूर्ण आहार है।केला- केला आपके लिए एक संपूर्ण आहार है। इसके पर्याप्त मात्रा में वसा और शकर होती है जो शरीर को ना केवल ऊर्जा होती है बल्कि दूसरे पोषक तत्व भी होते हैं। केले में इतनी शकर होती है कि यदि इसे आप खाकर वजन तौलेंगे तो ये बढ़ा हुआ ही आएगा। केले का दूध के साथ सेवन भी कर सकते हैं। केले का शेक भी फायदेमंद है।
अंडा प्रोटीन का भी अच्छा सोर्स है।



अंडा- अंडा वजन बढ़ाने में सहायक है। अंडे में फैट और कैलोरी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। एक अंडे का रोजाना सेवन आपके लिए बहुत फायदेमंद है। अंडे में प्रोटीन की मात्रा भी होती है और कई दूसरे विटामिंस भी। हालांकि ध्यान रखें कि कच्चा अंडा भूलकर भी ना खाएं। यह आपको कई रोग दे सकता है। 

किशमिश भिगोकर खाने में ज्यादा फायदा पहुंचाती है।किशमिश-किशमिश आपका वजन बढ़ाने के लिए काफी है। यदि आप पूरे दिन में एक मुट्ठी किशमिश का सेवन चलते-फिरते भी करते हैं तो आपका वजन बढ़ाने के लिए काफी है। आप चाहें तो किशमिश और अंजीर को संतुलित मात्रा में लेकर और रातभर भिगोने के बाद खाएंगे तो ना केवल आपका वजन बढ़ेगा बल्कि कई तरह के रोग भी दूर होंगे। 




बादाम- सर्दियों में बादाम खाना ना केवल फायदेमंद है बल्कि दिमाग के लिए तो यह रामबाण औषधि है। बादाम के कई फायदे हैं। और जहां तक वजन बढ़ाने की बात है बादाम एक शानदार वेट गेन का सोर्स है। आप 3-4 बादाम रातभर पानी में भिगोकर और सुबह पीसकर दूध में घोलकर इसका सेवन करने से एक महीने के अंदर आपका वजन बढ़ा जाएगा। 

वजन का कनेक्शन लाइफ स्टाइल से भी है। वजन बढ़ाने के लिए जितना अच्छा खाना जरूरी होता है उतनी ही अच्छी लाइफ स्टाइल भी जरूरी है। अच्छी दिनचर्या का मतलब है टाइम से नाश्ता, लंच और रात का खाना। भूख लगने पर अच्छा स्नैक्स लेना और सही समय पर पर्याप्त मात्रा में नींद लेना भी आपके वजन को बढ़ाने में सहायक होता है। 


नोटः  वजन बढ़ाने और शरीर सुडोल बनाने के लिए घरेलू नुस्खों को दर्शाता यह लेख आपकी जागरूकता और समझ बढ़ाने के लिए साझा किया गया है। यदि किसी बीमारी के पेशेंट हैं तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। 

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Tuesday, December 3, 2019

आंखों की रोशनी बढ़ाने में मदद करेंगे ये योगासन, देखिए इसे करने का सही तरीका

December 03, 2019 0

आंखों की रोशनी बढ़ाने में मदद करेंगे ये योगासन, देखिए इसे करने का सही तरीका


आजकल की दिनचर्या का बहुत ज्यादा असर आंखों पर पड़ता है। दिनभर मोबाइल और कंप्यूटर पर काम करने की वजह से नजर का कमजोर होना, आंखों से पानी आना, सिर भारी होना और इसके साथ आंखों में जलन जैसी परेशानियों का होना आम बात है। बहुत सारी दवाईयों और डॉक्टरों के इलाज के बाद भी अगर बीमार आंखों के इलाज का सही तरीका नहीं मिल रहा है तो रोजाना योग करें। योग के इन आसनों की मदद से आंखों की सारी परेशानियों से निजात मिल जाएगी।


सबसे पहले दोनों हाथों को सामने की तरफ कर के गर्दन को सीधे रखें। गर्दन को सीध में रखते हुए हाथों के अंगूठों के नोक को दोनों आंखों को घुमाते हुए देखें। इसके बाद एक हाथ को नीचे की तरफ और दूसरे हाथ को ऊपर की तरफ रखें। अब गर्दन को एक सीध में रखते हुए नजरों को घुमाते हुए एक बार ऊपर वाले हाथ को देखे फिर नीचे वाले हाथ को देखें। ऐसा करीब दस से बारह बार करें।


आंखों की दूसरी एक्सरसाइज में चारों ओर देखें। एक बार ऊपर फिर नीचे फिर दांए और बांए। इस एक्सरसाइज को करते हुए हल्की सांस लेते रहें। इसके अलावा गर्दन को एक सीध में रखते हुए एक बार ऊपर और एक बार नीचे की ओर देखे। इस तरह से ये कसरत करीब दस से बारह बार करें।


ध्यान रहें नजरों की तकलीफ होने पर शीर्षासन या पेट के बल करने वाली एक्सरसाइज न करें। अगली एक्सरसाइज में करीब पचास से सौ बार पलकों को झपकाएं और उसके तुरंत बाद दोनों हाथों की हथेलियों को रगड़कर आंखों पर रखें। 


इसके बाद दोनों हाथों की अंगुलियों को आंखों पर रखकर कुछ देर बैठे। ये क्रिया पांच से सात बार करें। और एक बार फिर से हथेलियों को रगड़कर आंखों पर रखें।


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Monday, December 2, 2019

healthy living tips : हमेशा हेल्दी और फिट रहना चाहते हैं तो अपनाएं ये 10 टिप्स

December 02, 2019 0

healthy living tips : हमेशा हेल्दी और फिट रहना चाहते हैं तो अपनाएं ये 10 टिप्स




हमेशा अपने जीवन में एक आदत को शामिल कर लें, वो यह कि जिंदा रहने के लिए खाएं, खाने के लिए न जिएं। तभी आप हमेशा स्वस्थ रह सकते हैं। लेकिन खाने के साथ-साथ कुछ अन्य बातें भी है, जिनका आपको ध्यान रखना चाहिए।

आइए जानें...

* नियमित रूप से व्यायाम करें और जांच कराएं।

* अंकुरित दालें, सब्जियां, फल, दूध आदि का नियमित सेवन करें।

* एसिडिटी व पेट की अन्य समस्याओं से बचने के लिए इकट्ठा खाने की बजाय थोड़े-थोड़े समय में संतुलित आहार लें।
* घर के साथ आसपास भी सफाई का पूरा ख्याल रखें।
* नल या बोरिंग के पानी को उबालें, ठंडा करें, छानें और फिर पीएं तो किसी भी बीमारी में जल्दी फायदा होता है।

* अपना वजन नियंत्रित रखें।

* ज्यादा छिलके वाले खाद्य पदार्थ जैसे दाल छिलके वाली, सेवफल, कच्चा जाम, अनार आदि छिलके सहित खाएं।

* ज्यादा तला भुना (तले हुए खाद्य पदार्थ) न खाएं।

* मौसमी फलों व सब्जियों का ही उपयोग करें।

* बाजार के डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ न लें।
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Ayurvedic Benefits Of Tulsi : तुलसी के पत्तों के 5 आश्चर्यजनक फायदे जानिए

December 02, 2019 0

Ayurvedic Benefits Of Tulsi : तुलसी के पत्तों के 5 आश्चर्यजनक फायदे जानिए



तुलसी के पत्तों का इस्तेमाल केवल पूजन सामग्री के तौर पर ही नहीं किया जाता। आयुर्वेद के अनुसार तुलसी के पत्तों में आश्चर्यजनक गुण होते है, जो सेहत की दृष्टि से बेहद फायदेमंद होते है। आइए, जानते हैं उन्हीं के बारे में -


1. तुलसी के पत्तों में एंटी ऑक्सीडेंट होते है, जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता यानी कि इम्यून सिस्टम को मजबूत करते हैं।

2. यदि आपको सर्दी व फिर हल्का बुखार हो गया हो तो आप मिश्री, काली मिर्च और तुलसी के पत्ते को पानी में अच्छी तरह से पकाकर काढ़ा बना ले और फिर इसे पी ले। आप चाहें तो इस घोल को सुखाकर इसकी गोलियां बनाकर भी खा सकते हैं। इससे आपको सर्दी व हल्के बुखार में फायदा होगा।
3. जिन लोगों को सांस की दुर्गंध की समस्या होती है उन्हें रोजाना सुबह उठकर तुलसी के कुछ पत्तों को मुंह में रखना चाहिए, ऐसा करने से सांस की दुर्गंध धीरे-धीरे कम होने लगेगी।

4. यदि आपको कहीं चोट लग जाए तो आप तुलसी के पत्तों को फिटकरी के साथ मिलाकर, अपने घाव पर लगा सकते हैं, ऐसा करने से चोट व घाव जल्दी ठीक होने में मदद मिलेगी।

5. यदि आपको दस्त हो गए हैं तो तुलसी के पत्तों को जीरे के साथ मिलाएं और पीस लें। अब इस मिश्रण को दिनभर में 3-4 बार चाटते रहें। ऐसा करने से आपको दस्त बंद होने में फायदा मिलेगा।
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Winter skin care : घर में बनाएं नाइट सीरम और पाएं नेचुरल ग्लो

December 02, 2019 0

Winter skin care : घर में बनाएं नाइट सीरम और पाएं नेचुरल ग्लो


सर्दियों का मौसम आते ही चेहरे पर रूखेपन की समस्या आम हो जाती है जिसके लिए हम हर तरह की क्रीम का इस्तेमाल करने से भी नहीं चूकते। लेकिन इन तमाम क्रीमों का इस्तेमाल करने के बाद भी चेहरे पर वो सॉफ्टनेस नजर नहीं आती, जो हम चाहते हैं। उलटा चेहरे पर चिपचिपाहट व डलनेस नजर आने लगती है। अगर आप अपने स्कीन केयर रूटीन में कुछ बदलाव करें तो इन तमाम समस्याओं से निपटा जा सकता है।
आप सभी ने सीरम का नाम तो सुना ही होगा। सीरम के सही और नियमित इस्तेमाल से चेहरे में चमक आती है। यदि आप बाजार से महंगे सीरम लाने से बचना चाहती हैं। तो यहां हम आपको बता रहे हैं कि कैसे आप घर में ही सीरम तैयार कर सकती हैं?

कैसे करें घर में सीरम तैयार :

ग्लीसरीन के फायदों से तो हम सभी भली-भांति परिचित हैं। ग्लीसरीन आपके चेहरे में सॉफ्टनेस लाने के लिए बहुत फायदेमंद होता है। तो आइए जानते हैं, कैसे आप ग्लीसरीन से घर में सीरम तैयार कर सकते हैं। सबसे पहले आप 2 चम्मच ग्लीसरीन लें। अब इसमें समान मात्रा में गुलाब जल मिलाएं, साथ ही कुछ बूंदें इसमें नींबू की डालें।
रात में सोने से पहले इसे अपने पूरे चेहरे और हाथ-पैरों में लगाएं और इस बात का ध्यान रखें कि इसे लगाने से पहले पूरे चेहरे को अच्छी तरह से साफ कर लें। इसके बाद इसे पूरे चेहरे और गर्दन पर लगाएं। इसी के साथ ही आप दूसरा सीरम इस तरह से तैयार कर सकती हैं। इसके लिए आपको एलोवेरा जेल की जरूरत होगी और विटामिन ई कैप्सूल की।

विटामिन-E सीरम तैयार करने के लिए सबसे पहले आप एलोवेरा का जैल लें। अब इसमें 2 से 3 विटामिन-ई की कैप्सूल डालें और इसे अच्छी तरह से मिक्स करें। इसके बाद पूरे चेहरे पर अप्लाई कर लें। यह एक नेचुरल सीरम है जिसका इस्तेमाल आप नियमित तौर पर कर सकती हैं।
इन सीरम को लगाने से पहले इस बात का जरूर ध्यान रखें कि यह आपको रात के वक्त ही लगाने है। दोपहर के समय यदि आप इनका इस्तेमाल करती हैं तो आपके चेहरे पर धूल-मिट्टी चिपकेगी और इसका कोई फायदा भी आपको नजर नहीं आएगा इसलिए रात के समय ही इन सीरम का इस्तेमाल करें।

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Sunday, December 1, 2019

बच्चों (शिशुओं) में कब्ज़ के लक्षण, कारण, घरेलू उपचार और परहेज (Home Remedies for Constipation in Kids)

December 01, 2019 0

बच्चों (शिशुओं) में कब्ज़ के लक्षण, कारण, घरेलू उपचार और परहेज (Home Remedies for Constipation in Kids)


प्रायः लोग ऐसा सोचते हैं कि कब्ज की समस्या केवल बड़े लोगों को ही होती है, लेकिन आपका सोचना सही नहीं है। छोटे बच्चे हों या बड़े बच्चे, कब्ज की समस्या सभी को हो सकती है। सच यह है कि जब वयस्क लोग कब्ज से परेशान होते हैं तो अपनी समस्या के बारे में दूसरों को बता देते हैं, लेकिन जब बच्चों को कब्ज के लक्षण महसूस होते हैं तो वे किसी को बता नहीं पाते। क्या आप जानते हैं कि बच्चों में कब्ज की समस्या को आप घरेलू उपाय (bacho ki kabj ke gharelu upay) द्वारा ही ठीक कर सकते हैं। क्या आप जानते हैं कि बच्चों के कब्ज की रामबाण दवा के रूप में कौन-कौन सी चीज इस्तेमाल में लाई जाती है।

कब्ज होना क्या है?(What is Children Constipation in Hindi?)

जब बच्चों की आंतों में तरल पदार्थों के अवशोषण में अत्यधिक समय लगने लगता है, तो इससे मल सूखा और कठोर होकर जमा होने लगता है। इसकी वजह से बच्चों को मल त्यागने में कठिनाई होती है। मल कम मात्रा में निकलता है। मल त्यागने के लिए बच्चों को घण्टों शौचालय में बैठे रहना पड़ता है। मल त्याग करते समय परेशानी होना, या मल का कम आना ही कब्ज कहलाता है। जब आंत स्वस्थ तरह से काम नहीं कर पाते हैं, और निकलने वाले मल की मात्रा कम हो जाती है तो कब्ज के लक्षण महसूस होते हैं। कब्ज के कारण मल कठोर तो होता ही है, साथ ही मल की चिकनाहट भी खत्म हो जाती है। 

कब्ज के प्रकार (Children Constipation Types)

कब्ज निम्न प्रकार के होते हैंः-
  • एक्यूट कॉन्सटीपेशन (जो कब्ज बच्चों में दो सप्ताह से कम समय तक रहे, उसे एक्यूट कब्ज (constipation) कहते हैं।)
  • क्रॉनिक कॉन्सटीपेशन (जो कब्ज बच्चों में दो सप्ताह से ज्यादा समय तक हो, उसे क्रॉनिक कब्ज (constipation) कहते हैं।)

छोटे बच्चों में कब्ज के लक्षण (Symptoms of Children Constipation in Hindi)

छोटे बच्चों के कब्ज के लक्षणों की पहचान ऐसे की जा सकती हैः-
  • कठोर, रूखा और जोर लगाकर मल त्याग करना।
  • हफ्ते में 3 बार से कम मल त्याग करना।
  • मल त्याग करते समय दर्द होना कब्ज का लक्षण है।
  • पेट में गैस रहना कब्ज का इलाज है।
  • बदहजमी होना कब्ज का लक्षण है।
  • पैरों में दर्द होना
  • एक सप्ताह से तीन से कम बार मल त्याग करना।
  • बहुत कमजोरी का अहसास
  • मल त्याग करते समय दर्द होना
  • पेट में दर्द होना कब्ज होने का लक्षण हो सकता है।
  • सिर में दर्द होना
  • यदि बच्चा मल त्याग करने से डरता हो कि ऐसा करने से उसे चोट पहुँचेगी, तो वह इससे बचने का प्रयास कर सकता है।
  • पेट में भारीपन लगना
 बच्चों में कब्ज की समस्या होने के कारण (Causes of Constipation in Kids)
इसके अलावा अन्य ये कारण हैं जिससे बच्चों को कब्ज की समस्या हो जाती हैः-
  • जब छोटे बच्चों को माता के दूध अर्थात् स्तनपान के साथ जब ऊपर के दूध का सेवन करवाया जाता है।
  • दूध के साथ जब बच्चों को सूखे अन्न का सेवन करवाया जाता है।
  • जब बच्चा किसी अन्य रोग से ग्रसित हो जाता है और उसका खाना-पीना बन्द हो जाता है।
  • जब आपके बच्चे की दिनचर्या में कोई परिवर्तन होता है जैसे- यात्रा या तनाव मल त्याग को प्रभावित कर सकता है।
  • जब बच्चे घर से बाहर स्कूल जाते हैं तो वह स्कूल में बने शौचालय को प्रयोग करने में हिचकिचाहट महसूस करते हैं।
  • डेयरी का दूध तथा अन्य उत्पाद भी बच्चे में कब्ज पैदा करने में सहायक होते हैं।
  • आहार में परिवर्तन होने, जैसे- बच्चे के भोजन में पर्याप्त फाइबर युक्त फल और सब्जियां या तरल पदार्थ नहीं होने पर कब्ज की समस्या हो सकती है।
  • नशीले पदार्थों का ज्यादा सेवन करना जैसे- शराब, ड्रग्स, धूम्रपान भी कब्ज के कारण हो सकते हैं।
  • भोजन करने के बाद तुरंत सो जाने से कब्ज की समस्या उत्पन्न होती है।
  • कुछ दवाएं, जो बच्चा अन्य कारणों से ले रहा है उससे भी कब्ज हो सकता है।
  • शरीर में पानी की कमी हेने पर कब्ज हो सकती है।
  • समय पर भोजन नहीं करने से भी कब्ज हो सकती है।
 बच्चों के कब्ज के इलाज के लिए घरेलू उपाय (Home Remedies for Constipation in Kids in Hindi)
आप बच्चों में कब्ज की समस्या के लिए ये घरेलू उपचार कर सकते हैंः-

बच्चों के कब्ज का रामबाण इलाज शहद से करें (Honey: Home Remedies for Constipation in Kids in Hindi)

  • कब्ज का आयुर्वेदिक तरीके से इलाज करने के लिए शहद और गर्म पानी का इस्तेमाल करें। सुबह खाली पेट एक गिलास गुनगुना पानी में दो चम्मच शहद मिलाएं। बच्चों को इसका सेवन करवाएं। इससे कब्ज दूर (bacho ki kabj ke gharelu upay) होती है।
  • सुबह जब आपके बच्चे का पेट खाली हो तो आप उसे एक ग्लास दूध में 1-2 चम्मच शहद और चीनी डालकर पिला सकते हैं।

बच्चों के कब्ज का रामबाण इलाज अंजीर से करें (Anjeer: Home Remedy to Treat Constipation in Kids in Hindi)

एक ग्लास दूध में थोड़े अंजीर उबाल लें। इसे सोने से पहले अपने बच्चे को पिलाएँ। यह उपाय कब्ज से राहत दिलाने में मदद करता है।

बच्चों के कब्ज का रामबाण इलाज बेकिंग सोडा से करें (Baking Soda: Home Remedy to Cure Constipation in Kids in Hindi)

बेकिंग सोडा को सामान्य भाषा में मीठा सोडा भी कहा जाता है। यह कब्ज में काफी फायदेमंद होता है। एक चौथाई कप गरम पानी में एक चम्मच मीठा सोडा मिलाकर बच्चों को पिलाएं।

हल्दी है बच्चों के कब्ज की दवा (Turmeric: Home Remedies to Cure Children Constipation in Hindi)

कब्ज का रामबाण इलाज करने के लिए हल्दी का प्रयोग करें। एक ग्लास गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर पिला दें। यह उपाय छोटे बच्चों के कब्ज को ठीक करने में मदद पहुंचाता है।

त्रिफला है बच्चों के कब्ज की दवा (Triphala: Home Remedies to Treat Children Constipation in Hindi)

कब्ज का आयुर्वेदिक तरीके से इलाज करने के लिए त्रिफला का प्रयोग करें। त्रिफला कब्ज के लिए सबसे सही हर्बल इलाज है। कब्ज से ग्रसित बच्चे को एक चम्मच त्रिफला पानी, या दूध में मिलाकर सोने से पहले दें। 

बादाम है बच्चों के कब्ज की दवा (Badam: Home Remedy for Children Constipation in Hindi)

रात को सोने से पहले गुनगुने दूध में 1 चम्मच बादाम का तेल डालकर बच्चे को पिलाएं। 15-20 दिन लगातार इस उपाय को करने से पुराना कब्ज ठीक हो जाता है। यह कब्ज की रामबाण दवा है।

बच्चों के पुरानी कब्ज का इलाज पपीता और अमरुद के जूस से करें (Papaya and Guava: Home Remedies for Constipation in Kids in Hindi)

कब्ज (कॉन्स्टिपेशन) की शिकायत हो तो आपको पपीते और अमरुद का जूस निकालकर बच्चे को सेवन कराना चाहिए। यह लाभ देता है। यह कब्ज की रामबाण इलाज दवा है।

बच्चों के पुरानी कब्ज का इलाज मुनक्का से करें (Munakka: Home Remedy for Constipation in Kids in Hindi) 

कब्ज का रामबाण इलाज करने के लिए मुनक्कों का इस्तेमाल करें। 5-6  मुनक्कों को दूध में उबाल लें। पहले मुनक्का खाएं और बाद में दूध पी लें। यह उपाय छोटे बच्चों को लाभ पहुंचाता है।


बच्चों के पुरानी कब्ज का इलाज इसबगोल भूसी से करें (Isabgol Husk: Home Remedy for Children Constipation in Hindi)

कब्ज का आयुर्वेदिक तरीके से इलाज करने के लिए ईसबगोल भूसी का उपयोग करें। 10 ग्रा. ईसबगोल भूसी 100 ग्रा. दही में घोल लें। सुबह-शाम में खाने से कब्ज की शिकायत खत्म (bacho ki kabj ke gharelu upay) हो जाती है।

कब्ज का रामबाण इलाज नींबू से करें (Lemon: Home Remedy for Children Constipation in Hindi)

आप कब्ज की दवा के रूप में नींबू का इस्तेमाल कर सकते हैं। एक कप हल्के गर्म पानी में 1 नीम्बू निचोड़कर पिलाएं। इससे आंतों में जमा हुआ मल बाहर निकलता है। बेहतर परिणाम के लिए किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श लें।

कब्ज के इलाज के लिए अन्य घरेलू उपचार (Other Home Remedies for Constipation in Kids)

  • कब्ज का रामबाण इलाज करने के लिए अपने बच्चे को रेशेदार सब्जियों का सेवन करवाएं। सब्जी में शलगम, गाजर, पत्ता गोभी, चुकंदर, लौकी, पालक का इस्तेमाल करें।
  • कब्ज से ग्रसित बच्चों के लिए अनफाईड खाना काफी फायदेमंद होता है जो कब्ज की समस्या से ग्रसित हैं।
  • बच्चे को कब्ज होने पर उसे एक ग्लास संतरे के जूस में आधा ग्लास पानी, दिन में दो बार पिलाएं। यह कब्ज की दवा है।
  • गुनगुने पानी को एक टब में डालें। कब्ज से ग्रसित बच्चे को उस में बैठा दें। कम से कम 15-20 मिनट तक उसे गुनगुने पानी में खेलने दें। वो खेलता रहेगा और कब्ज दूर (bacho ki kabj ke gharelu upay) हो जाएगी।
  • एक गिलास दूध में 1-2 चम्मच घी मिलाकर रात को सोते समय पीने से भी कब्ज पूरी तरह दूर हो सकती है।
  • बच्चे को कब्ज होने पर एक ग्लास संतरे का जूस आधा ग्लास पानी मिलाकर दिन में दो बार दें। यह कब्ज का रामबाण इलाज करता है।
  • कब्ज की दवा के रूप में अलसी के बीज का चूर्ण बना लें। रात में आधा चम्मच चूर्ण पानी के साथ दें।
  • आधा कप पानी में किशमिश भीगोएँ, और फिर उन्हें मिश्रण करें। उस पानी को बच्चें को दें। यह भी कब्ज की दवा है।

कब्ज की समस्या में बच्चों का खान-पान (Children’s Diet in Constipation Problem)

कब्ज की परेशानी के दौरान बच्चों का खान-पान ऐसा होना चाहिएः-
  • कब्ज से पीड़ित बच्चों को चोकर सहित आटे की रोटी तथा हरी पत्तेदार सब्जियां खाने के लिए देनी चाहिए।
  • बच्चों को अधिक से अधिक फलों का सेवन करना चाहिए, जैसे-पपीता, संतरा, खजूर, नारियल, अमरूद, अंगूर, सेब, खीरा, गाजर, चुकन्दर, बेल, अखरोट, अंजीर आदि।
  • नींबू पानी, नारियल पानी, फल तथा सब्जियों का रस कब्ज से पीड़ित बच्चे की दिनचर्या में सम्मिलित करें।
  • कच्चे पालक का रस हर रोज सुबह तथा शाम को पीने से कब्ज रोग पूरी तरह से ठीक हो सकता है।
  • बच्चों को सुबह के समय में उठते ही 1-2 गिलास पानी पिलाएं, और उसके बाद शौच के लिए भेजें।
  • बच्चों को रोज 6-7 मुनक्का खाने को दें।
  • कब्ज रोग से पीड़ित बच्चों को शाम के समय सूर्य की रोशनी से गर्म पानी पिलाएं। इसके बाद ‘इसबगोल की भूसी’ खाने के लिए दें।
  • कब्ज से ग्रस बच्चों को मैदा, बेसन, तली-भुनी, मिर्च मसालेदार खाद्य पदार्थ का सेवन नहीं करना (home remedies for constipation in kids) चाहिए।
  • कब्ज से ग्रसित बच्चों को जब भूख लगे तभी खाना खाने को देना चाहिए।
  • बच्चों में 1 गिलास गर्म दूध में 1 चम्मच एरण्ड का तेल मिला लें। इसे पीने से कब्ज का रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

कब्ज की समस्या में बच्चों की जीवनशैली (Children’s Lifestyle in Constipation Problem)

कब्ज की परेशानी के दौरान बच्चों की जीवनशैली ऐसी होनी चाहिएः-
  • कब्ज से पीड़ित बच्चों को सुबह के समय में खुली हवा में रोजाना सैर कराएं।
  • बच्चों को भोजन करने के बाद लगभग 5-10 मिनट तक वज्रासन में बैठना चाहिए।
  • यदि सुबह के समय में वज्रासन का नियमित रूप से प्रयोग करे तो शौच जल्दी आ जाती है।
  • पानी पीकर कई प्रकार के आसन करने से कब्ज रोग ठीक (home remedies for constipation in kids) हो जाता है, जैसे – सर्पासन, कटी-चक्रासन, पादहस्तासन आदि।
  • बच्चों के लिए प्राणायाम और योग अभ्यास भी फायदेमंद होते हैं।

बच्चों को कब्ज होने पर परहेज (Avoid These in Children’s Constipation Problem)

बच्चों को कब्ज की समस्या में निम्न परहेज करने चाहिएः-
  • फास्ट फूड जैसे- बर्गर, फ्रैंच फ्राइज और पिज्जा खाने से बचना चाहिए, (home remedies for constipation in kids), क्योंकि ऐसे खाद्य पदार्थों में पोषक तत्व नहीं होते।
  • ऐसे तत्व होते हैं जिनसे डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है। ये बच्चों को नहीं खिलाना चाहिए।
  • बच्चों को व्हाइट ब्रैड ना दें।
  • बच्चों को चाय एवं कॉफी का भी अधिक सेवन नहीं करना चाहिए।
  • रेड मीट का सेवन बन्द करा दें, क्योंकि इसमें आयरन बहुत कम पाया जाता है। इससे रोगी को ज्यादा नुकसान पहुँचता है।
  • चॉकलेट का सेवन बन्द करा दें।

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मोटापा घटाने के लिए विशेष योग आसान : Yog Asana for Fat reduction

December 01, 2019 0

मोटापा घटाने के लिए विशेष योग आसान : Yog Asana for Fat reduction


द्वि-चक्रिकासन-1 :

विधि- पीठ के बल लेटकर हाथों के पंजे नितम्बों के नीचे रख श्वास रोककर एक पैर को पूरा ऊपर उठाकर घुटने से मोड़कर एड़ी नितम्ब के पास होकर गोलाकार (साइकिल चलाने की तरह) घुमाते रहें। इसी प्रकार दूसरे पैर से इस क्रिया को करें। पैरों को बिना जमीन पर टिकाये घुमाते रहें, पैरों से वृत्ताकृति बनायें, इस सम्पूर्ण क्रियाभ्यास को ‘द्वि-चक्रिकासन-1’ कहते हैं। 10 से लेकर यथाशक्ति 25-30 बार इसकी आवृत्ति करें। थक जाने पर शवासन में थोड़ी देर विश्राम करके इसी अभ्यास को विपरीत दिशा से दोहरायें।

द्वि-चक्रिकासन-2 :

विधि- इसी क्रिया के द्वितीय चरण में दोनों पैरों को घुटनों से मोड़ते हुए घुटनों को छाती पर सटा दें, अब श्वास लेने तथा छोड़ने की क्रिया के साथ दोनों पैरों को (साईकिल के पैडल घुमाने की भाँति) वामावर्त्त घुमाइये, यही क्रिया दक्षिणावर्त्त में भी दोहराना द्वि-चक्रिकासन-2 कहलाता है।
सावधानी- कमरदर्द, हृदयरोग, उच्चरक्तचाप और हर्निया से ग्रसित व्यक्ति इस दूसरी अवस्था का अभ्यास न करें।
लाभ-
मोटापा घटाने के लिए यह सर्वोत्तम आसन है, नियमित रूप से 5 से 10 मिनट तक इसका अभ्यास करने से निश्चित ही अनावश्यक भार कम हो जाता है।
A उदर को सुडौल बनाता है, आँतों को सक्रिय करता है। कब्ज, मन्दाग्नि, अम्लपित्त, धरन आदि की निवृत्ति करता है।
सम्पूर्ण शरीर में रक्त-संचारण को तेज करके रक्त शुद्धि करता है।

पादवृत्तासन-1 :

विधि- सीधे लेटकर दायें पैर को उठाकर शून्याकृति बनाते हुए घड़ी की दिशा में 5 से 10 आवृत्तियाँ करें। एक दिशा में घुमाने के बाद दूसरी दिशा में पैर को घड़ी की विपरीत दिशा (एंटी क्लॉकवाइज) में वृत्ताकार घुमायें, तब दूसरे पैर से भी ठीक इसी प्रकार अभ्यास करें। यह पूरी क्रिया ‘पादवृत्तासन-1’ कहलाती है।

पादवृत्तासन-2 : 

विधि- एक-एक पैर से करने के पश्चात् दोनों पैरों से एक साथ इस अभ्यास को करें, पैरों को ऊपर-नीचे, दायें एवं बायें चारों ओर जितना ले जा सकते हैं, उतना ले जाते हुए घुमायें। दोनों पैरों से दोनों दिशाओं से अर्थात् वामावर्त्त (क्लॉकवाइज) तथा दक्षिणावर्त्त (एंटी क्लॉकवाइज) घुमाने की क्रिया ‘पादवृत्तासन-2’ कहलाती है।
लाभ- जंडा, नितम्ब एवं कमर के बढ़े हुए मेद को निश्चित रूप से दूर करता है, तथा उदर को हल्का व सुडौल बनाता है। शरीर के सन्तुलन के लिए यह बहुत उपयोगी है।

अर्द्धहलासन :

विधि- पीठ के बल लेटकर हथेलियां भूमि की ओर, पैर सीधे एवं पंजे मिले हुए व तने हुए हों। अब श्वास अन्दर भरकर पैरों को 90 डिग्री (समकोण) तक धीरे-धीरे ऊपर उठाकर कुछ समय तक इस स्थिति में स्थिर रहें, वापस आते समय धीरे-धीरे पैरों को नीचे भूमि पर टिकायें, झटके के साथ नहीं। कुछ विश्राम कर, फिर यही क्रिया करें, इसे ‘अर्द्धहलासन’ कहते हैं। इसे 3 से 6 बार करना चाहिए।
सावधानी-
जिनको कमर में अधिक दर्द रहता हो, वे एक-एक पैर से क्रमश इस आसन का अभ्यास करें; दोनों पैर से एक साथ अभ्यास न करें।
लाभ-
यह आसन आंतों को सबल एवं निरोग बनाता है, तथा कब्ज, गैस, मोटापा आदि को दूर कर जठराग्नि को प्रदीप्त करता है।
नाभि का डिगना, हृदयरोग, पेट दर्द एवं श्वासरोग में भी उपयोगी है। एक-एक पैर से क्रमश रुकने पर कमर दर्द में विशेष लाभप्रद है।
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Thursday, November 28, 2019

बवासीर (पाइल्स) के लक्षण, कारण, घरेलू इलाज और परहेज : Home Remedies for Piles (Hemorrhoids)

November 28, 2019 0

बवासीर (पाइल्स) के लक्षण, कारण, घरेलू इलाज और परहेज : Home Remedies for Piles (Hemorrhoids)


बवासीर को Piles या Hemorrhoids भी कहा जाता है। बवासीर एक ऐसी बीमारी है, जो बेहद तकलीफदेह होती है। इसमें गुदा (Anus) के अंदर और बाहर तथा मलाशय (Rectum) के निचले हिस्से में सूजन आ जाती है। इसकी वजह से गुदा के अन्दर और बाहर, या किसी एक जगह पर मस्से बन जाते हैं। मस्से कभी अन्दर रहते हैं, तो कभी बाहर आ जाते हैं। करीब 60 फीसदी लोगों को उम्र के किसी न किसी पड़ाव में बवासीर की समस्या होती है। रोगी को सही समय पर पाइल्स का इलाज (Piles Treatment) कराना बेहद ज़रूरी होता है। समय पर बवासीर का उपचार नहीं कराया गया तो तकलीफ काफी बढ़ जाती है।


यह एक अनुवांशिक समस्या भी है। यदि परिवार में किसी को यह समस्या रही हो, तो इससे दूसरे व्यक्ति को होने की आशंका रहती है। बहुत पुराना होने पर यह भगन्दर का रूप धारण कर लेता है जिसे फिस्टुला (Fistula) भी कहते हैं। इसमें असहाय जलन एवं पीड़ा होती है।

बवासीर के प्रकार (Piles (Hemorrhoids) Types)

बवासीर दो प्रकार की होती हैं, जो ये हैंः-

खूनी बवासीर

खूनी बवासीर में किसी प्रकार की पीड़ा नहीं होती है। इसमें मलत्याग करते समय खून आता है। इसमें गुदा के अन्दर मस्से हो जाते हैं। मलत्याग के समय खून मल के साथ थोड़ा-थोड़ा टपकता है, या पिचकारी के रूप में आने लगता है।
मल त्यागने के बाद मस्से अपने से ही अन्दर चले जाते हैं। गंभीर अवस्था में यह हाथ से दबाने पर भी अन्दर नहीं जाते। इस तरह के बवासीर का तुरंत उपचार कराएं। 

बादी बवासीर

बादी बवासीर में पेट की समस्या अधिक रहती है। कब्ज एवं गैस की समस्या बनी ही रहती है। इसके मस्सों में रक्तस्राव नहीं होता। यह मस्से बाहर आसानी से देखे जा सकते हैं। इनमें बार-बार खुजली एवं जलन होती है। शुरुआती अवस्था में यह तकलीफ नहीं देते, लेकिन लगातार अस्वस्थ खान-पान और कब्ज रहने से यह फूल जाते हैं। इनमें खून जमा हो जाता है, और सूजन हो जाती है।
इसमें भी असहनीय पीड़ा होती है, और रोगी दर्द से छटपटाने लगता है। मलत्याग करते समय, और उसके बाद भी रोगी को दर्द बना रहता है। वह स्वस्थ तरह से चल-फिर नहीं पाता, और बैठने में भी तकलीफ महसूस करता है। इलाज कराने से यह समस्या ठीक हो जाती है। 

बवासीर होने के लक्षण (Piles or Hemorrhoids Symptoms)

कई बार बवासीर यदि गंभीर अवस्था में ना पहुंचा हो तो यह 4-5 दिनों में अपने आप ही ठीक हो जाता है, लेकिन रोग बढ़ने पर ये लक्षण देखे जा सकते हैंः-
  • गुदा के आस-पास कठोर गांठ जैसी महसूस होती है। इसमें दर्द रहता है, तथा खून भी आ सकता है।
  • शौच के बाद भी पेट साफ ना हेने का आभास होना।
  • शौच के वक्त जलन के साथ लाल चमकदार खून का आना।
  • शौच के वक्त अत्यधिक पीड़ा होना।
  • गुदा के आस-पास खुजली, एवं लालीपन, व सूजन रहना।
  • शौच के वक्त म्यूकस का आना।
  • बार-बार मल त्यागने की इच्छा होना, लेकिन त्यागते समय मल न निकलना।
इन लक्षणों को बिल्कुल भी नजरंदाज ना करें। जल्द से जल्द डॉक्टर के पास जाकर पाइल्स का इलाज  कराएं।

बवासीर होने के कारण (Piles or Hemorrhoids Causes)

आयुर्वेद में बवासीर को ‘अर्श’ कहा गया है। यह वात, पित्त एवं कफ तीनों दोषों के दूषित होने से होता है। इसलिए इसे त्रिदोषज रोग कहा गया है।  जिस बवासीर में वात या कफ की प्रधानता होती है, वे अर्श शुष्क होते हैं। इसलिए मांसांकुरों में से स्राव नहीं होता है। जिस अर्श में रक्त या पित्त या रक्तपित्त की प्रधानता होती है, वे आर्द्र अर्श होते है। इसमें रक्तस्राव होता है। शुष्क अर्श में पीड़ा अधिक होती है।
कुछ लोगों में यह रोग पीढ़ी दर पीढ़ी देखा जाता है, लेकिन कुछ में अन्य कारणों से भी होता है, जो ये हैंः-
  • कुछ व्यक्तियों को अपने रोजगार की वजह से घंटे खड़े रहना पड़ता है, जैसे- बस कंडक्टर, ट्रॉफिक पुलिस इत्यादि। इसके साथ ही जिन्हें भारी वजन उठाना पड़ता है। इन लोगों को बवासीर से पीड़ित होने की अधिक संभावना रहती है। 
  • कब्ज भी बवासीर का एक प्रमुख कारण है। कब्ज में मल सूखा एवं कठोर होता है, जिसकी वजह से व्यक्ति को मलत्याग करने में कठिनाई होती है। काफी देर तक उकड़ू बैठे रहना पड़ता है। इस कारण से वहां की रक्तवाहिनियों पर जोर पड़ता है, और वह फूलकर लटक जाती है, जिन्हें मस्सा कहा जाता है।
  • अधिक तला एवं मिर्च-मसाले युक्त भोजन करना।
  • शौच ठीक से ना होना।
  • फाइबर युक्त भोजन का सेवन न करना।
  • महिलाओं में प्रसव के दौरान गुदा क्षेत्र पर दबाव पड़ने से बवासीर होने का खतरा रहता है।
  • आलस्य या शारीरिक गतिविधि कम करना।
  • धूम्रपान और शराब का सेवन।
  • अवसाद

बवासीर और भगन्दर में अन्तर (Difference between Piles and Fistula)

  • बवासीर में गुदा एवं मलाशय के निचले भाग की रक्तवाहिनियों में सूजन आ जाती है। ऐसा लम्बे समय तक कब्ज और शौच में अत्यधिक समय तक बैठे रहने से होता है।
  • इसके अलावा मोटापा या गर्भवती महिलाओं में भी यह होने का खतरा रहता है। इसमें गुदा या मलाशय में मस्से बन जाते हैं, जिनके फूटने पर इनसे खून निकलता है, और दर्द होता है।
  • भगन्दर में मस्से नहीं होते हैं। भगन्दर में एक घावयुक्त नली बन जाती है, जो गुदा नलिका (internal opening) तथा गुदा के बाहर
  • (external opening) की त्वचा में होती है।
  • भगन्दर उन लोगों में होता है, जिनके मलद्वार के पास कोई फोड़ा हो जाता है। फोड़े में कई मुंह बन जाते है। ऐसे में यदि रोगी व्यक्ति उससे छेड़छाड़ करता है तो भगन्दर हो जाता है।
  • इसमें से खून और मवाद लगातार निकलता रहता है। शुरुआती अवस्था में इसमें मवाद और खून की मात्रा कम होती है। इसलिए इससे रोगी के वस्त्रों में केवल दाग मात्र लगता है। धीरे-धीरे रिसाव बढ़ता जाता है, और रोगी को खुजली, बेचैनी और दर्द होने लगता है। 
बवासीर के इलाज के लिए घरेलू नुस्खे (Home Remedy for Piles (Hemorrhoids) Treatment)
आप बवासीर (पाइल्स) के घरेलू इलाज (Bavasir ka upchar) के लिए ये उपाय कर सकते हैंः-

एलोवेरा के प्रयोग से बवासीर का इलाज (Use Aloe vera for Piles Treatment in Hindi)

एलोवेरा के सूजनरोधक और चिकित्सकीय गुणों से बवासीर की जलन कम हो जाती है, और कब्ज की समस्या नहीं होती। यह आंतरिक और बाह्य दोनों प्रकार के पाइल्स के इलाज में लाभदायक है। गुदा के बाहर के मस्सों में एलोवेरा जेल लगाएं। यह जलन और खुजली को शांत करता है। एलोवेरा के 200-250 ग्राम गूदे को खाएं। इससे कब्ज नहीं (Bavasir ka upchar) होगी और मलत्यागने में आसानी होगी।

बवासीर में फायदेमंद सेब का सिरका (Use Apple Vinegar for Piles Treatment in Hindi)

सेब का सिरका अपने कषाय गुणों के कारण रक्तवाहिनियों को सिकोड़ने में मदद करता है। खूनी बवासीर में एक गिलास पानी में सेब के सिरके का एक चम्मच डालकर दिन में दो बार पिएं। बादी बवासीर में सेब के सिरके में रुई भिगाकर गुदा में रखें। इससे जलन और खुजली से राहत मिलेगी।

बवासीर के उपचार के लिए जैतून के तेल का इस्तेमाल (Olive Oils : Home Remedy for Piles Treatment in Hindi)

जैतून के तेल में सूजन ठीक करने वाले गुण होते हैं। यह रक्तवाहिकाओं में आई सूजन को कम करता है। जैतून के तेल को बादी बवासीर के मस्सों पर लगाएं।

बवासीर में लाभदायक बादाम का तेल (Badam oil : Home Remedies for Hemorrhoids Treatment in Hindi)

शुद्ध बादाम के तेल में रुई को डुबोएं, तथा बादी बवासीर में मस्सों पर लगाएं। यह सूजन और जलन को कम करता है।

नारियल का उपयोग कर बवासीर में लाभ (Coconut : Home Remedy for Hemorrhoids Treatment in Hindi)

नारियल की जटाओं को जलाकर राख या भस्म बना लें। इसे ताजे मट्ठे में मिलाकर सुबह खाली पेट नियमित रूप से पिएं।

बवासीर के घरेलू उपचार के लिए जीरे का प्रयोग (Jeera : Home Remedies to Cure Hemorrhoids in Hindi)

  • बादी बवासीर में दर्द और जलन होने पर जीरे के दानों को पानी के साथ पीसकर लेप बना लें। इसे मस्सों वाली जगह पर लगाएं।
  • खूनी बवासीर में जीरे को भूनकर मिश्री के साथ पीस लें। इसे दिन में 2-3 बार 1-2 ग्राम की मात्रा में मट्ठे के साथ लें।

पाइल्स का घरेलू उपचार पपीते से (Benefits of Papaya in Piles Disease in Hindi)

रात के भोजन में पपीता खाएं। इससे कब्ज नहीं होगी। इससे मल त्याने के समय होने वाली पीड़ा नहीं होगी।

गर्म पानी का प्रयोग दिलाता है बवासीर के दर्द में तुरंत राहत (Uses of Hot Water in Piles Treatment in Hindi)

बाथ टब (Sitz bath) में गर्म पानी डालकर 10-15 मिनट तक बैठें। यह बवासीर के दर्द, और जलन से आराम पाने का सबसे अच्छा इलाज है

बवासीर की बीमारी के दौरान आपका खान-पान  (Your Diet in Piles or Hemorrhoids)

अधिक फाइबरयुक्त आहार का सेवन करें, जैसे- रेशेदार फल एवं सब्जियाँ।
  • रोजाना 7-8 गिलास पानी पिएं।
  • भोजन में नियमित रूप से छाछ का सेवन करें।

बवासीर की बीमारी के दौरान जीवनशैली (Your Lifestyle in Piles or Hemorrhoids)

  • नियमित रूप से व्यायाम एवं प्राणायाम करें।
  • अधिक देर तक एक ही जगह पर बैठे ना रहें।

बवासीर में परहेज (Avoid These in Piles or Hemorrhoids)

अगर आप पाइल्स का इलाज करवा करें हैं या बवासीर से पीड़ित हैं तो इन चीजों का परहेज करना बहुत जरूरी हैः-
  • जंक-फूड
  • तला-भुना एवं मिर्च-मसाले युक्त भोजन का सेवन बिल्कुल न करें।

बवासीर से संबंधित सवाल और जवाब (FAQ Related Piles or Hemorrhoids)

बवासीर को लेकर आप अक्सर ये सवाल पूछते हैंः-
क्या बवासीर का इलाज केवल सर्जरी से संभव है?
बवासीर का इलाज केवल सर्जरी ही है, लेकिन यह सच नहीं है। समय पर किए गए उपचार, एवं बेहतर जीवनशैली से इस रोग को ठीक (Bavasir ka upchar) किया जा सकता है।
बवासीर के कारण होने वाली क्या दूसरी बीमारियां होती हैं?
बवासीर में अत्यधिक खून बहने के कारण शरीर में खून की कमी हो सकती है। व्यक्ति कमजोरी महसूस करने लगता है। लम्बे समय तक बीमारी के बने रहने, और इलाज की कमी के कारण यह कोलोरेक्टल कैंसर (Colorectal Cancer) का कारण भी बन सकता है। इसलिए लक्षण दिखते ही बवासीर का उपचार (Bavasir ka upchar) कराएं।
सर्जरी के बाद बवासीर दोबारा हो सकता है?
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में सर्जरी ही इसका एकमात्र समाधान है, और सर्जरी के बाद भी यह रोग दोबारा हो जाता है। इसलिए घरेलू उपचार और बेहतर जीवनशैली अपनाना चाहिए। इससे बवासीर के दोबारा होने की संभावना बहुत कम हो जाती है।
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